4.10.08

भगवान्..

भगवान् ने हमेशा मेरा विश्वास तोडा.
इसीलिए....
कभी नहीं रही मेरी आस्थाएं
उसके लिए...
एक दिन गलती से
मैंने तुम्हे भी
भगवान् मान लिया था!

4 comments:

राहुल सि‍द्धार्थ said...

चलते-चलते आपकी छोटी पर अच्छी कविता पर नजर पडी.
शुभ्कामनाऍ

bhawana said...

kitne sunder dhang se abhivakt kiya ....its awesome ...

Subhash Ujjwal said...

bahut sundaer abhiwaqty.........ni:h sabd huuuun isis tareh likhty rahe aap..sada

सीमांत सोहल said...

आज फिर आपका ब्लॉग गहराई से देखने को विवश हो गया !